भारत ने छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम और फ्रांस-नेतृत्व वाले ‘फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम’ (FCAS) से जुड़ने की दिशा में 2026 से प्रयास तेज कर दिए हैं। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब देश का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का ‘एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट’ (AMCA) कार्यक्रम विकास के दौर से गुजर रहा है। फ्रांस और जर्मनी द्वारा संचालित FCAS में उन्नत स्टील्थ, सेंसर फ्यूजन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मानव-रहित विमानों के साथ संयुक्त संचालन जैसी अत्याधुनिक क्षमताएं शामिल हैं। वैश्विक स्तर पर ऐसे दो बड़े समूहों में एक तरफ FCAS है, तो दूसरी तरफ यूके, इटली और जापान का ‘ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम’ (GCAP) सक्रिय है।
भारत अपनी रक्षा आत्मनिर्भरता के तहत एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) और डीआरडीओ (DRDO) के माध्यम से AMCA को आगे बढ़ा रहा है, लेकिन भविष्य की तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विदेशी साझेदारियों के विकल्प भी खुले रखे गए हैं। इसके अलावा, सुखोई-30 एमकेआई बेड़े का उन्नयन भी वायुसेना की प्राथमिकताओं में शामिल है।
संसदीय स्तर पर भी इस दिशा में सक्रियता बढ़ गई है। 18वीं लोकसभा की रक्षा संबंधी स्थायी समिति ने 7 अगस्त 2026 को अपनी 25वीं रिपोर्ट पेश करते हुए रक्षा मंत्रालय से छठी पीढ़ी के विमान कार्यक्रम के लिए एक स्पष्ट रोडमैप और तयशुदा प्रगति-पथ की मांग की है। साथ ही, फ्रांस की ओर से 114 राफेल विमानों के लिए ₹3.25 लाख करोड़ का प्रस्ताव भी विचाराधीन है, जबकि रूस के सु-57 विकल्प को भारत ने आगे नहीं बढ़ाया है। यह समग्र दृष्टिकोण दर्शाता है कि भारत आगामी वायु युद्ध तकनीकों में अपनी मजबूत स्थिति सुनिश्चित करने के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है।


