लोकसभा ने सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को बिना चर्चा के पारित कर दिया। इसका उद्देश्य शीर्ष अदालत की न्यायिक क्षमता बढ़ाना और लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करना है। विधेयक के कानून बनने के बाद सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश भी शामिल होंगे।
यह विधेयक 20 जुलाई 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मई 2026 में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। यह मई 2026 में जारी अध्यादेश का स्थान लेगा, जिसके माध्यम से मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की गई थी।
1 जनवरी 2026 तक सुप्रीम कोर्ट में 92,101 मामले लंबित थे। ऐसे में अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति से अधिक पीठों का गठन संभव होगा और मामलों की सुनवाई तेज करने में मदद मिल सकती है।
संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत सुप्रीम कोर्ट की स्थापना और संरचना का प्रावधान है, जबकि संसद को कानून के माध्यम से न्यायाधीशों की संख्या निर्धारित करने का अधिकार है। वर्ष 2019 में भी अदालत की स्वीकृत न्यायाधीश संख्या बढ़ाई गई थी।


