अरुणाचल प्रदेश की ग्लाव झील को रामसर स्थल का दर्जा मिलने के साथ देश के आर्द्रभूमि संरक्षण नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। 3 अगस्त 2026 को घोषित इस मान्यता के बाद ग्लाव झील राज्य की पहली रामसर साइट और भारत की 101वीं रामसर साइट बन गई है। यह झील लोहित जिले में स्थित कामलांग टाइगर रिजर्व के भीतर है।
ग्लाव झील एक ऊंचाई पर स्थित मीठे पानी की झील है, जिसे पर्वतीय जलधाराओं से पानी मिलता है। यह पूर्वी हिमालय की समृद्ध जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण आवास है। झील और इसके आसपास के क्षेत्र में 150 से अधिक पेड़-पौधों की प्रजातियां तथा 49 ऑर्किड प्रजातियां पाई जाती हैं। इस जैव विविधता के कारण इसका पारिस्थितिक महत्व काफी अधिक है।
रामसर स्थल का दर्जा 1971 में अपनाए गए रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों को दिया जाता है। भारत 1982 में इस कन्वेंशन का पक्षकार बना था। आर्द्रभूमियां भूजल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण और वन्यजीव संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
ग्लाव झील के जुड़ने से भारत में रामसर स्थलों की संख्या 2014 के 26 से बढ़कर 101 हो गई है। यह देश में आर्द्रभूमि संरक्षण के बढ़ते प्रयासों को दर्शाता है।


