चीन के क़िंगहाई-तिब्बत पठार और हेंगदुआन पर्वतों की ऊँचाइयों पर पाई जाने वाली Saxifraga candelabrum नामक फूलदार प्रजाति को वैज्ञानिकों ने आधिकारिक तौर पर मांसाहारी घोषित कर दिया है। ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, यह पौधा छोटे कीटों को फँसाकर उनसे नाइट्रोजन जैसे जरूरी पोषक तत्व ग्रहण करता है। इस खोज ने चार्ल्स डार्विन की उस 1875 की परिकल्पना को पुख्ता कर दिया है, जिसमें उन्होंने कुछ Saxifraga प्रजातियों के मांसाहारी होने की संभावना जताई थी।
यह पौधा लगभग 2,500 मीटर से अधिक की ऊँचाई पर उगता है, जहाँ मिट्टी में पोषक तत्वों की भारी कमी होती है। इस कमी को पूरा करने के लिए पौधे के तनों और शाखाओं पर मौजूद लाल और चिपचिपे रोएँ छोटे कीटों (विशेषकर gnats) को आसानी से दबोच लेते हैं। हैरानी की बात यह है कि यह पौधा बेहद चुनिंदा तरीके से केवल छोटे कीटों को ही अपना शिकार बनाता है, जिससे बड़े परागणकारी सुरक्षित बचे रहते हैं।
कुनमिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बॉटनी और फ्लोरिडा म्यूज़ियम ऑफ नेचुरल History के शोधकर्ताओं ने ‘फ्लुओरेसेंट टैगिंग’ और ‘नाइट्रोजन आइसोटोप ट्रैकिंग’ जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए यह साबित किया कि यह पौधा पकड़े गए कीटों को पूरी तरह पचाकर नाइट्रोजन सोखता है। Saxifragaceae परिवार में मांसाहार का यह पहला प्रमाणित मामला है।
अध्ययन के जीनोमिक विश्लेषण से यह भी पता चला कि इस पौधे और अन्य मांसाहारी प्रजातियों में कई जीन समान हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि पौधों में मांसाहारी बनने की यह प्रवृत्ति अलग-अलग वंशों में स्वतंत्र रूप से यानी ‘कन्वर्जेंट इवोल्यूशन’ (अभिसारी विकास) के तहत विकसित हुई है। वनस्पति जगत में यह एक बेहद रोमांचक और ऐतिहासिक खोज है।


