भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए), बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ब्लू स्ट्रैगलर स्टार (Blue Straggler Star-BSS) के निर्माण की प्रक्रिया का दुर्लभ प्रत्यक्ष प्रमाण खोजा है। यह खोज तारों के विकास से जुड़े दशकों पुराने रहस्य को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। अध्ययन के परिणाम प्रतिष्ठित एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित हुए हैं।
शोधकर्ताओं ने पृथ्वी से लगभग 9,500 प्रकाश वर्ष दूर स्थित पुराने तारा समूह कोलिंडर-261 में मौजूद द्विआधारी तारा प्रणाली TIC 327546480 का अध्ययन किया। इसके लिए नासा के TESS मिशन और यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला के वेरी लार्ज टेलीस्कोप (VLT) से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि एक कम द्रव्यमान वाला साथी तारा लगातार अपना पदार्थ दूसरे तारे को स्थानांतरित कर रहा है, जिससे वह अधिक गर्म, अधिक चमकीला और अधिक विशाल ब्लू स्ट्रैगलर तारे में परिवर्तित हो रहा है।
वैज्ञानिकों ने इस प्रणाली से तीव्र एक्स-रे उत्सर्जन भी दर्ज किया, जो सक्रिय द्रव्यमान स्थानांतरण का महत्वपूर्ण प्रमाण है। शोध के अनुसार, यह प्रक्रिया लगभग 5.46 अरब वर्ष पहले शुरू हुई थी और आज भी जारी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज बाइनरी तारा प्रणालियों, तारकीय विकास और ब्रह्मांड में तारों के पुनर्जीवन की प्रक्रिया को समझने में नई दिशा प्रदान करेगी तथा भविष्य के खगोलीय अध्ययनों के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेगी।


