स्वच्छ भारत मिशन-Urban 2.0 के तहत मदनपल्ले ‘जीरो वेस्ट सिटी’ बनने की ओर अग्रसर

स्वच्छ भारत मिशन-Urban 2.0 के विजन को साकार करते हुए आंध्र प्रदेश की मदनपल्ले नगरपालिका वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और संसाधनों के सतत उपयोग के माध्यम से शहरी स्वच्छता का नया मॉडल प्रस्तुत कर रही है। नगरपालिका ने बढ़ते शहरीकरण और कचरे की चुनौती से निपटने के लिए स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, वैज्ञानिक प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण आधारित एकीकृत व्यवस्था विकसित की है। शहर में प्रतिदिन लगभग 62 टन ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जिसमें गीला, सूखा और घरेलू खतरनाक कचरा शामिल है।

नगरपालिका प्रतिदिन लगभग 15.5 टन गीले कचरे से कंपोस्ट तैयार कर रही है, जबकि 3 टन कचरे का वर्मी कम्पोस्टिंग के माध्यम से प्रसंस्करण किया जाता है। तैयार खाद का उपयोग शहर के पार्कों और हरित क्षेत्रों में किया जा रहा है। वहीं, सूखे कचरे को सामग्री पुनर्प्राप्ति केंद्र (एमआरएफ) भेजकर पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अधिकृत इकाइयों तक पहुंचाया जाता है और गैर-पुनर्चक्रण योग्य कचरे का सीमेंट उद्योगों में सह-प्रसंस्करण किया जाता है।

नगरपालिका ने रिड्यूस, रियूज एंड रीसायकल (RRR) केंद्र, ई-कचरा संग्रहण, ‘वेस्ट-टू-आर्ट’ परियोजना तथा बायो-माइनिंग जैसी पहलों को भी सफलतापूर्वक लागू किया है। बायो-माइनिंग के माध्यम से 36,512 मीट्रिक टन पुराने कचरे का निस्तारण कर लगभग 9.4 एकड़ भूमि को मुक्त कराया गया है, जिसमें से 5 एकड़ क्षेत्र को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया है।

सशक्त प्रशासन, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी के बल पर मदनपल्ले अब ‘जीरो डंप’ और ‘जीरो लिटरिंग’ शहर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह मॉडल देश के अन्य शहरी निकायों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।

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