संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 4 सितंबर 2026 को अफ्रीकी देशों की एक महत्वपूर्ण पहल का समर्थन करते हुए ऐसे मानचित्रों को बढ़ावा देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिनमें महाद्वीपों का आकार उनके वास्तविक अनुपात के अधिक करीब दिखाई देता है। इस कदम के साथ शिक्षा और सार्वजनिक मानचित्रण में 16वीं सदी के पारंपरिक मर्केटर प्रोजेक्शन से हटकर ‘ईक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया है।
पारंपरिक मर्केटर प्रोजेक्शन समुद्री नौवहन के लिए उपयोगी रहा है क्योंकि यह दिशा को सही रखता है, लेकिन यह ध्रुवों के पास स्थित क्षेत्रों जैसे ग्रीनलैंड को आवश्यकता से बहुत बड़ा दिखाता है। अफ्रीकी देशों का तर्क था कि यह वैश्विक धारणा को प्रभावित करता है और अफ्रीका जैसे बड़े महाद्वीपों के वास्तविक भौगोलिक महत्व को कम करके दिखाता है, जिसे उन्होंने “संज्ञानात्मक न्याय” का मुद्दा बताया।
वर्ष 2018 में पेश किया गया ‘ईक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ देशों और महाद्वीपों के क्षेत्रफल को उनके वास्तविक अनुपात के बहुत करीब रखता है, जो इसे स्कूल एटलस और शैक्षणिक सामग्री के लिए अधिक उपयुक्त बनाता है। टोगो के नेतृत्व में लाए गए इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा में 164 मतों के भारी समर्थन से अपनाया गया, जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए टोगो ने 2026 के अंत तक अपने स्कूली पाठ्यक्रम और भूगोल की किताबों को अपडेट करने की योजना बनाई है।


