पर्यावरण मंत्री ने उलानबातर में भारत के हरित वित्त ढांचे और ग्रीन क्रेडिट पहल का किया जिक्र

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने मंगोलिया के उलानबातर में संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण निवारण सम्मेलन (यूएनसीसीडी) के 17वें पक्षकार सम्मेलन (सीओपी17) के दौरान ‘स्वस्थ भूमि और सूखा प्रतिरोधकता के लिए नवाचारी वित्तीय तंत्र’ विषय पर मंत्रिस्तरीय संवाद को संबोधित किया।

श्री यादव ने स्पष्ट किया कि भूमि पुनर्स्थापन को केवल एक लागत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह भोजन, जल, जैव विविधता, आजीविका और दीर्घकालिक स्थिरता में एक महत्वपूर्ण निवेश है। उन्होंने मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे से निपटने के लिए सार्वजनिक बजट से आगे बढ़कर विविध और निरंतर वित्तीय स्रोतों के साथ मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।

अपने संबोधन में, उन्होंने भारत के मिश्रित हरित वित्त ढांचे का उल्लेख किया, जो जलवायु अनुकूलन, सतत भूमि उपयोग और जैव विविधता संरक्षण के लिए पूंजी जुटाने में सहायक है। उन्होंने पूंजी जुटाने के साधन के रूप में संप्रभु हरित बांडों की भूमिका को रेखांकित किया। इसके अलावा, उन्होंने भारत की अनूठी बाजार-आधारित ‘ग्रीन क्रेडिट’ पहल पर प्रकाश डाला, जिसके तहत सार्वजनिक और निजी संस्थाएं खराब हो चुकी वन भूमि के पुनर्स्थापन में वित्तपोषण करती हैं। यह क्रेडिट पांच साल बाद और संतोषजनक वन घनत्व प्राप्त होने पर जारी किए जाते हैं, जिनका उपयोग सीएसआर दायित्वों के लिए किया जा सकता है।

अंत में, श्री यादव ने इस बात पर विशेष बल दिया कि नवाचारी वित्त का मूल्यांकन केवल जुटाए गए संसाधनों से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि क्या यह उन समुदायों और पारिस्थितिक तंत्रों तक पहुंचता है जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

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