सारस एमके-II: भारत के स्वदेशी विमानन को मिली नई उड़ान

भारत के स्वदेशी विमानन क्षेत्र को बड़ी सफलता मिली है। बेंगलुरु स्थित सीएसआईआर-नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेट्रीज (सीएसआईआर-एनएएल) ने 8 जुलाई 2026 को सारस एमके-II (Saras Mk-II) हल्के परिवहन विमान के डिजाइन चरण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। 19 सीटों वाला यह स्वदेशी ट्विन-टर्बोप्रॉप विमान छोटे हवाई अड्डों और क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत बनाने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना भारत की आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल को नई गति देने वाली महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

सारस एमके-II को कम दूरी की नागरिक उड़ानों तथा छोटे रनवे वाले हवाई अड्डों से संचालन के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें प्रेसराइज्ड केबिन, डिजिटल एवियोनिक्स, ग्लास कॉकपिट, ऑटोपायलट तथा कमांड-बाय-वायर फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश किया गया है, जिससे इसकी सुरक्षा, दक्षता और संचालन क्षमता बढ़ेगी।

डिजाइन चरण पूरा होने के बाद अब सीएसआईआर-एनएएल प्रोटोटाइप निर्माण और बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी करेगा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) प्रमुख धातु पुर्जों के निर्माण में सहयोग कर रही है, जबकि अन्य औद्योगिक साझेदारों को भी उत्पादन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इस विमान की पहली परीक्षण उड़ान दिसंबर 2027 तक कराने का लक्ष्य रखा गया है। सफल परीक्षणों के बाद इसका उपयोग क्षेत्रीय नागरिक उड्डयन के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में भी किया जाएगा। भारतीय वायु सेना ने भी इसमें रुचि दिखाई है और प्रारंभिक रूप से कम से कम 15 विमानों की आवश्यकता जताई है। इससे स्पष्ट है कि सारस एमके-II भविष्य में भारत की नागरिक एवं सैन्य विमानन क्षमताओं को नई मजबूती प्रदान करेगा।

संबंधित लेख

- Advertisement -spot_img

नवीनतम