डब्ल्यूटीओ के मत्स्य सब्सिडी समझौते में शामिल हुआ भारत, समुद्री संसाधन संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मत्स्य सब्सिडी समझौते को औपचारिक रूप से स्वीकार करते हुए वैश्विक समुद्री संसाधनों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 20 जुलाई 2026 को स्वीकृति-पत्र जमा करने के साथ भारत इस समझौते को अपनाने वाला डब्ल्यूटीओ का 123वां सदस्य बन गया। यह समझौता जून 2022 में जिनेवा में आयोजित डब्ल्यूटीओ की 12वीं मंत्रिस्तरीय बैठक में स्वीकार किया गया था।

इस समझौते का उद्देश्य ऐसी सरकारी सब्सिडियों पर रोक लगाना है, जो अवैध, अनियंत्रित और अनरिपोर्टेड (IUU) मछली पकड़ने तथा समुद्री संसाधनों के अत्यधिक दोहन को बढ़ावा देती हैं। हालांकि, यह नियम एक्वाकल्चर (मछली पालन) और अंतर्देशीय मत्स्य पालन पर लागू नहीं होगा।

भारत ने समझौते का समर्थन करते हुए विकासशील देशों के हितों की भी पैरवी की है। भारत ने दूसरे चरण की वार्ताओं में 25 वर्ष की संक्रमण अवधि की मांग की है, ताकि छोटे और पारंपरिक मछुआरों की आजीविका प्रभावित न हो। साथ ही, भारत ने दूरस्थ समुद्री क्षेत्रों में काम करने वाले बड़े औद्योगिक मत्स्य बेड़ों पर अधिक कड़े नियम लागू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।

यह समझौता समुद्री जैव संसाधनों के संरक्षण, टिकाऊ मत्स्य प्रबंधन और निष्पक्ष वैश्विक व्यापार व्यवस्था को बढ़ावा देगा। भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी मत्स्य सब्सिडी विश्व में सबसे कम है और प्रति मछुआरा परिवार औसतन लगभग 15 डॉलर प्रतिवर्ष के बराबर है। ऐसे में यह समझौता पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ छोटे मछुआरों के हितों को संतुलित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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