भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए एयरशिप आधारित हाई एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट (AS-HAPS) कार्यक्रम की शुरुआत की है। लगभग 15,000 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य स्वदेशी स्ट्रैटोस्फेरिक एयरशिप विकसित करना है, जो सीमा निगरानी, खुफिया जानकारी संग्रह, संचार और सामरिक निगरानी जैसे महत्वपूर्ण कार्य लंबे समय तक कर सकें।
हाई एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट (HAPS) ऐसे एयरशिप या फिक्स्ड-विंग प्लेटफॉर्म होते हैं, जो पृथ्वी के 20–30 किलोमीटर ऊंचे स्ट्रैटोस्फियर में संचालित होते हैं। ये सामान्य ड्रोन से अधिक ऊंचाई पर और लो-अर्थ ऑर्बिट उपग्रहों से नीचे कार्य करते हैं, जिससे किसी क्षेत्र की लगातार निगरानी और आवश्यकता अनुसार दिशा परिवर्तन संभव होता है।
इस परियोजना का संचालन भारतीय वायुसेना के डायरेक्टरेट ऑफ ऑपरेशंस (रिमोट) द्वारा किया जा रहा है तथा इसे मेक-I श्रेणी के तहत विकसित किया जा रहा है, जिसमें सरकार प्रोटोटाइप विकास लागत का 70% तक सहयोग देती है। एयरशिप में रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस पेलोड और आधुनिक संचार प्रणाली लगाई जाएगी।
मई 2025 में DRDO ने 17 किमी ऊंचाई पर प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण किया था, जबकि फरवरी 2026 में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने इसकी खरीद को मंजूरी दी। यह कार्यक्रम भारत की सीमा सुरक्षा, एयरोस्पेस क्षमता और रक्षा आत्मनिर्भरता को नई मजबूती प्रदान करेगा।


