राजस्थान के उदयपुर स्थित उबेश्वर वन्यजीव क्षेत्र में 12 जुलाई 2026 को दुर्लभ लौदांकिया वाइन स्नेक (Ahaetulla laudankia) का सफलतापूर्वक दस्तावेजीकरण किया गया। इस दुर्लभ प्रजाति की तस्वीर वन्यजीव फोटोग्राफर रोहित द्विवेदी ने शरद अग्रवाल और दीपल कालरा के मार्गदर्शन में ली। लगभग 30 वर्षों बाद उदयपुर क्षेत्र में इस प्रजाति का यह पहला आधिकारिक रिकॉर्ड माना जा रहा है, जो अरावली क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के महत्व को रेखांकित करता है।
अहेतुला लौदांकिया का वैज्ञानिक वर्णन पहली बार वर्ष 2019 में किया गया था। यह भारत की स्थानिक (एंडेमिक) प्रजाति है और वाइन स्नेक समूह का सदस्य है। इसकी पहचान लंबे, पतले शरीर, चेस्टनट-भूरे रंग, शरीर पर काले धब्बों तथा सिर के निचले हिस्से पर सफेद निशानों से होती है। इसकी लंबाई सामान्यतः 80 सेंटीमीटर से 1.5 मीटर तक होती है और यह दिन में सक्रिय रहने वाला वृक्षवासी सांप है।
यह हल्का विषैला रियर-फैंग्ड सांप मुख्यतः शुष्क पर्णपाती वनों, झाड़ीदार क्षेत्रों और पहाड़ी ढलानों में पाया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका पुनः रिकॉर्ड होना इस बात का प्रमाण है कि यदि प्राकृतिक आवासों का प्रभावी संरक्षण किया जाए तो दुर्लभ प्रजातियां भी सुरक्षित रह सकती हैं। यह खोज अरावली क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा और प्रेरणा प्रदान करेगी।


