नई दिल्ली, 15 जुलाई 2026: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने सुश्रुत जयंती के अवसर पर नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) में आयोजित त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘सौश्रुतम् 2026’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान के अत्याधुनिक एमआरआई सेक्शन का भी शुभारंभ किया।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने आचार्य सुश्रुत को शल्य चिकित्सा का जनक बताते हुए कहा कि सदियों पहले उनके द्वारा विकसित शल्य चिकित्सा पद्धतियां अपने समय की वैज्ञानिक क्रांति थीं। उन्होंने प्लास्टिक सर्जरी, मोतियाबिंद, ट्यूमर उपचार तथा ईएनटी सर्जरी जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जबकि सुश्रुत संहिता ने विश्व चिकित्सा विज्ञान को नई दिशा प्रदान की।
राष्ट्रपति ने कहा कि आयुर्वेद की समग्र जीवन-दृष्टि आज भी मानवता के लिए अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने आयुर्वेद को आधुनिक विज्ञान, डिजिटल हेल्थ, मानकीकृत दस्तावेजीकरण और अनुसंधान तकनीकों से जोड़ने पर बल दिया, जिससे इसकी वैश्विक स्वीकार्यता और मजबूत होगी।
युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों से उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण, व्यावहारिक अनुसंधान और उच्च गुणवत्ता वाले साक्ष्य विकसित करने का आह्वान किया। साथ ही चिकित्सा में नैतिकता, करुणा और नई तकनीकों के समुचित उपयोग पर जोर दिया।
एआईआईए द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत सहित कई देशों के प्रसिद्ध सर्जन, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग लेकर आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा के भविष्य पर विचार-विमर्श करेंगे।


