भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पुरातात्विक विशेषज्ञता के माध्यम से दक्षिण-पूर्व एशिया के कई ऐतिहासिक मंदिरों और मठों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) लाओस, इंडोनेशिया, कंबोडिया, वियतनाम और म्यांमार में स्थित प्राचीन हिंदू, बौद्ध और चाम सभ्यता से जुड़े विरासत स्थलों के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन कार्यों में तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है। यह पहल साझा सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को भी मजबूत कर रही है।
एएसआई संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली संस्था है, जो भारत में पुरातात्विक अनुसंधान और स्मारकों के संरक्षण के साथ विदेशों में भी तकनीकी सहायता उपलब्ध कराती है। लाओस के वाट फू मंदिर, इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर, कंबोडिया के ता प्रोहम और प्रेह विहार मंदिर, वियतनाम के माय सन अभयारण्य तथा डोंग डुओंग बौद्ध मठ सहित कई महत्वपूर्ण विरासत स्थलों के संरक्षण में भारत सक्रिय सहयोग दे रहा है। इसके अलावा म्यांमार के आनंद मंदिर के संरक्षण में भी भारतीय विशेषज्ञ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इन परियोजनाओं से न केवल ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण सुनिश्चित हो रहा है, बल्कि भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध भी मजबूत हो रहे हैं। यह पहल वैश्विक स्तर पर विरासत संरक्षण के क्षेत्र में भारत की विशेषज्ञता और नेतृत्व को नई पहचान प्रदान कर रही है।


