बिहार की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को एक बड़ी पहचान मिली है। नालंदा की बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक, गया के पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट तथा भोजपुर की पिड़िया पेंटिंग को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राज्य के बुनकरों, शिल्पकारों, कलाकारों और संबंधित संस्थाओं को बधाई दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला-कौशल और ग्रामीण प्रतिभा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाली है। उन्होंने बताया कि GI टैग मिलने से इन उत्पादों को कानूनी संरक्षण मिलेगा तथा वैश्विक बाजार में उनकी विशिष्ट पहचान और प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
उन्होंने इस सफलता का श्रेय कारीगरों, बुनकरों, महिला कलाकारों, उत्पादक समूहों और National Bank for Agriculture and Rural Development सहित सभी हितधारकों को दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हस्तशिल्प, हथकरघा और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। GI टैग मिलने से इन उत्पादों के विपणन, ब्रांडिंग और निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।


