बंगाल की मशहूर मिठाई ‘जलभरा संदेश’ को मिला जीआई टैग

पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के चंदननगर की प्रसिद्ध पारंपरिक मिठाई जलभरा संदेश (जलभरा) को भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्रदान किया गया है। लगभग 220 वर्ष पुरानी इस अनूठी बंगाली मिठाई को अब उसकी क्षेत्रीय पहचान, गुणवत्ता और सांस्कृतिक विरासत के लिए आधिकारिक मान्यता मिल गई है। जीआई टैग मिलने से इसकी मौलिकता सुरक्षित रहेगी और चंदननगर की मिठाई परंपरा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

जलभरा संदेश अपनी विशेष बनावट और स्वाद के कारण अन्य मिठाइयों से अलग माना जाता है। इसका बाहरी भाग मुलायम छेना से बनाया जाता है, जबकि अंदर तरल भराव होता है। इस भराव में पारंपरिक रूप से गुलाब का शरबत या नोलेन गुड़ का रस भरा जाता है। मिठाई को काटते ही भीतर से निकलने वाला मीठा तरल इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।

इस मिठाई का आविष्कार 19वीं शताब्दी में चंदननगर के तेलिनीपाड़ा क्षेत्र में प्रसिद्ध मिठाई निर्माता सूर्य मोदक और उनके पुत्र सिद्धेश्वर मोदक द्वारा किया गया था। जीआई टैग मिलने के बाद केवल चंदननगर में पारंपरिक विधि से तैयार मिठाई ही जलभरा संदेश नाम से बेची जा सकेगी। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगेगी, स्थानीय कारीगरों को आर्थिक लाभ मिलेगा तथा चंदननगर की समृद्ध पाक-सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिलने में मदद मिलेगी।

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