भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र की स्टैटिक टेस्ट फैसिलिटी में सॉल्वे (Sub-Orbital Launch Vehicle for Experiments – SOLVE) के ठोस रॉकेट मोटर का पहला सफल ग्राउंड टेस्ट किया। यह उपलब्धि भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य गगनयान के क्रू मॉड्यूल की पैराशूट आधारित रिकवरी एवं सुरक्षित अवतरण प्रणाली की विश्वसनीयता का परीक्षण करना है।
सॉल्वे एक कॉम्पैक्ट सब-ऑर्बिटल परीक्षण प्रक्षेपण यान है, जिसे विशेष रूप से गगनयान मिशन के विभिन्न सुरक्षा परीक्षणों के लिए विकसित किया गया है। यह वाहन क्रू मॉड्यूल को लगभग 10 से 17 किलोमीटर की ऊँचाई तक ले जाने में सक्षम है। निर्धारित ऊँचाई पर पहुँचने के बाद मॉड्यूल रॉकेट से अलग हो जाता है और उसके बाद क्रमिक रूप से 10 पैराशूट खुलते हैं, जो उसकी गति को नियंत्रित करते हुए उसे सुरक्षित रूप से समुद्र में उतारते हैं।
सॉल्वे का ठोस रॉकेट चरण पीएसएलवी (PSLV) के स्ट्रैप-ऑन मोटर पर आधारित है, लेकिन इसे परीक्षण आवश्यकताओं के अनुसार संशोधित किया गया है। इसमें धीमी गति से जलने वाला विशेष प्रोपेलेंट, सीधा नोजल तथा सेकेंडरी इंजेक्शन थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल (SITVC) प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिससे उड़ान के दौरान बेहतर नियंत्रण और स्थिरता सुनिश्चित होती है।
गगनयान मिशन भारत का पहला स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसके तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। सॉल्वे के माध्यम से किए जा रहे परीक्षण वास्तविक मिशन के दौरान क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह सफलता भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता को और मजबूत करने के साथ भविष्य के उन्नत अंतरिक्ष अभियानों का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।


